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mahashivratri 2018 महाशिवरात्रि क्यों मनाया जाता है? महाशिवरात्रि मनाने के पीछे बहुत से पौराणिक कहानियां है जिनके बारे में जानते है.

भारत में  महाशिवरात्रि 2018 
महाशिवरात्रि 2018 

  हेल्लो दोस्तों www.chhotubhai.com  में आपका स्वागत है. आज हम महाशिवरात्रि के  बारे में जानेंगे।

 दोस्तों  हम भारतदेश में रहते है और ये हिन्दू प्रधान देश है  जैसे की आप सब जानते है यहाँ पर सभी महाशिवरात्रि का त्यौहार हमेशा से मानते आ रहे है और इस दिन भगवान शंकर जी की विशेष पूजा की जाती है.
जिसमे भक्तगण  भगवान् शिव को प्रसन्न करने के लिए तरह-तरह से पूजा अर्चना करते है. कोई दूध,घी, पंचामृत, और न जाने कितनी कीमती चिजे भगवन को अर्पित कर अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए आशीर्वाद मांगते है.
महाशिवरात्रि  कब है 
इस साल 2018  में महाशिवरात्रि 13  फरवरी को पड़ रहा है 12  फरवरी की रात से ही मंदिरो में भरी भीड़ इकट्ठा होना शुरू हो जाता है. और लम्बी लम्बी लाइनों में लगकर लोग भगवन शिव को अपना भेंट अर्पित करते है.

महाशिवरात्रि क्यों मनाया जाता है ?

महाशिवरात्रि मनाने के पीछे बहुत से पौराणिक कहानियां है जिनके बारे में जानते है

पहली कहानी :- मनन जाता है की समुद्र मंथन के बाद अमृत और विष को पिने में सुर और असुरों के बिच काफी तनाव हो गया. जिसके बाद भगवान् श्री शंकर ने विष को इसी रात को महाशिवरात्रि की रात्रि  को ही अपने गए में धारण कर लिया और विष का अंत कर दिया। जिसके बाद से ही भगवन शंकर का नाम नीलकंठ  पड़ा.

दूसरी कहानी:-  शिकारी की कहानी है जो की बहुत ही प्रसिद्ध है. इस कहानी के अनुसार एक शिकारी था जो की बहुत गरीब था और शिकार करके अपना घर चलाता था. लेकिन वह एक साहूकार का कर्जदार था जिसे लेने के लिए साहूकार उसके पास गया और अपने धन को मांगने लगा वह शिकारी गरीब होने के कारन उसका धन वापस करने में उस वक्त असमर्थ था जिसके कारन साहूकार ने उसे एक शिव मंदिर में बंदी बना कर रख लिया। उसके अगले दिन ही शिवरात्रि थी और शिव मंदिर में उसने शिव कथा सुनी जिसमे शिवरात्रि व्रत की विधि और उसे उसके महिमा के बारे में उसने जाना । जिसके बाद वह शिकारी एक दिन की मोहलत माँगा और साहूकार को यह वचन दिया की वह उसेक सारे धन वापस कर देगा। जिसे सुन कर साहूकार ने उसे जाने दिया. चूँकि वह दिन शिवरात्रि था और उसने एक सिन से कुछ भी नहीं खाया पिया था जिसके बाद वह भूखा प्यासा अपने शिकार पर निकल पड़ा और एक तालाब के पास बेल पेड़ के ऊपर चढ़ कर घात लगाकर अपने धनुष के साथ बैठ गया.


    उसे मालूम नहीं था की बेल पेड़ के निचे एक बहुत पुरानी शिवलिंग थी. वह शिकारी बहुत देर बैठे रहा और बेल के पत्तो को तोड़ कर फेकता जा रहा था. वह बेल के पत्ते शिवलिंग पर जा कर पद रहे थे थे. मगर वह शिकारी इस बात से अनजान था. और फिर अचानक उसे एक हिरणी आती हुयी दिखाई दी. उसने अपना धनुष तान कर निशाना साधा वह हिरणी गर्भवती थी. तब उसे देख वह थोड़ा रुक गया फिर और तब हिरणी ने उस शिकारी से निवेदन किया की मई गर्भ से हु तुम दो दो जोवों की हत्या मत करो मई इस बच्चे को जन्म देने से बाद आउंगी तो मुझे मार लेना अभी मुझे जाने दो. तब उस शिकारी ने उसे जाने दिया.
 उस शिकारी का ह्रदय परिवर्तन हो चूका था कुकी उसने भगवन शिव की अनजाने में ही उपवास करके आराधना की थी और बेल पत्र चढ़कर उसने भगवान् शिव को प्रसन्न कर दिया था. इस प्रकार उस शिकारी को मोक्ष की प्राप्ति हुई.
इस प्रकार तब से ऐसा माना जाता है की अगर शिवरात्रि के दिन उपवास रखकर भगवन शिव को बेल पत्र अर्पित किया जाये तो उस व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती और उसकी हर मनोकामना पूरी होती है.


यह एक पौराणिक कथा है
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