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संत ज्ञानेश्वर की प्रेरणादायी लघु कहानी. hindi motivational story. hindi short story.

sant gyaneshvar hindi story
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    संत ज्ञानेश्वर महान संत थे. एक बार वह नदी के किनारे किनारे चल रहे थे तथा उस नदी में एक बच्चा नहा रहा था अचानक बच्चे का पैर फिसला तो बच्चा नदी के साथ बहाने लगा और वह बहुत कोसिसो के बाद भी तैर नहीं पा रहा था और फिर डर के कारण जो रजोर से चिल्लाने लगा।  उसकी आवाज इतनी ज्यादा तेज़ थी की नदी के किनारे जप कर रहे एक साधु की तपस्या टूट गयी और उस साधु ने आंखे खोलकर देखा तो लड़का तेज़ बहाव के साथ नदी में बह रहा था मगर फिर आंख बंद करके जप करने लगा.



संत ज्ञानेश्वर ने जब बहते हुए बच्चे को देखा तो तुरंत ही नदी में कूदकर और बच्चे को बचाकर नदी के किनारे पर ले आये।
इसके बाद उन्होंने तपस्या में लीन साधु के पास जाकर पूछा की आप क्या  कर रहे है? तो साधु ने कहा मई तपस्या कर रहा हु.
तब संत ज्ञानेश्वर ने कहा की क्या आपको ईश्वर की प्राप्ति हुई?
साधु ने निराश मन से जवाब दिया और कहा "नहीं मन स्थिर ही नहीं हो रहा है"
तब संत ज्ञानेश्वर ने उस साधु से कहा "तो उठो पीड़ित और असहाय लोगो की सहायता करो उनके कष्टों को जितना हो सके दूर करो अन्यथा यह जब करना बेकार है.
 साधु को अपने भूल का पछतावा होने लगा वह यह बात समझ गया था की केवल ईशवर की ध्यान करने ईश्वर की प्राप्ति नहीं हो सकती। अगर उनकी सच्ची सेवा करनी है तो उनके द्वारा इस संसार में भेजी गयी उनके जीव अंश, मनुष्य की सहायता करनी चाहिए। जो ईश्वर की सही सेवा है.


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