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ए. आर. रहमान  (ड्राइवर से विश्व प्रसिद्द संगीतकार)

ए. आर. रहमान  (ड्राइवर से विश्व प्रसिद्द संगीतकार)


"आज मुझे कोई धुन सूझती है तो मुझे नींद नहीं अति मई अचानक अधि रत को उठ कर काम करना सुरु कर देता हु और लगातार सात आठ घंटे उस पर बिता देता हूँ सुबह जब सोता हु तो मुझे सपने आते है की लोग मेरा इंतजार कर रहे है और फिर अचानक मेरा सपना बिच में टूट जाता है मेरे संगीत का मकसद उन करोडो लोगो की आत्मा की गहराइयों तक पहुंचना है जिनका प्यार और समर्थन मुझे मिला है इसके लिए जरुरी है की मेरा संगीत मेरी आत्मा से उत्पन्न हो "
                                                           ए. आर. रहमान.....

                                           उनका जीवन सफर

ए. आर. रहमान मद्रास के एक मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखते है जब ए. आर. रहमान  केवल ९ वर्ष के थे तब ही उनके पिता जी का देहांत हो गया ए. आर. रहमान  को बचपन से वायलिन बजने का शौक था वे मद्रास तथा अन्य शहरों में संगीत कार्यक्रमों में वायलिन बज कर उससे प्राप्त होने वाले पैसो से परिवार को मदद करते थे
 ११ वी कक्षा तक आते-आते मुझे स्कुल की पशै उन्हें बिच में ही छोड़नी पड़ी ,उन्होंने गाड़ी चलन सिख ताकि उन्हें ड्राइवर की नौकरी मिल जाये पहली बार 1987 में अल्विन ट्रेंडी घड़ियों के लिए उन्होंने पहल संगीत दिया और फिर रोज़ा फिल्म के साथ फिल्म जगत में आये.
1988 में मुस्लमान पीर शेख अब्दुल कादीर जिलानी के संपर्क में अपकार उन्होंने इस्लाम धर्म अपनाया और दिलीप कुमार हिन्दू से अल्लारखा रहमान मुस्लिम हो गए आज व भारत के सबसे लोगप्रिया संगीतकर है  बॉलीवुड की 50 से ज्यादा फिल्मों में संगीत दे चुके है और भारत ही नहीं सारे विस्व में लोकप्रिय है
वे "बॉम्बे ड्रीम्स " और "लार्ड ऑफ़ द रिंग्स " से अंतर्राष्ट्रीय पहचान बन चुके है .
वे एक जबरजस्त गायक के रूप में "माँ तुझे सलाम" के साथ उभरे.
इतनी काम उम्र में दौलत, शोहरत और मांग के शिखर पर बैठे अल्लारक्खा रहमान को हैं घमंड आज तक छू नहीं पाया.
वे सारे संसार के युवाओं के लिए एक मिसाल बन चुके है.

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